परिचय

पत्तन विंग मुख्य रूप से भारत के एक्जिम व्यापार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक और पर्याप्त कार्गो संभलाई  क्षमता प्रदान करने के उद्देश्य से 12 प्रमुख बंदरगाहों के विकास के लिए जिम्मेदार है। पत्तनों द्वारा देश में लगभग 90% एक्जिम कार्गो की संभलाई मात्रा के अनुसार और 70% की संभलाई मूल्य के अनुसार की जाती है। बढ़ती जा रही व्यापार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, पत्तन क्षमता के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता में वृद्धि करते समय पत्तन विंग  मशीनीकरण, डिजिटलीकरण और प्रक्रिया सरलीकरण के माध्यम से प्रचालन क्षमता में सुधार करने का प्रयास करता है। परिणामस्वरूप, गत वर्षों में महापत्तनों द्वारा संस्थापित क्षमता और संभाले जाने वाले कार्गो की मात्रा में काफी वृद्धि हुई है। दक्षता के साथ ही, औसत टर्न एराउंड टाइम, प्रति पोत बर्थडे के औसत उत्पादन जैसे दक्षता मापदंडों में भी सुधार हुआ है

महापत्तन और गैर-महा पत्तन

देश में 12 महापत्तन और 200 गैर-महापत्तन (छोटे पत्तन) हैं। महापत्तन पोत परिवहन  मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं, जबकि गैर-महापत्तन संबंधित राज्य समुद्री बोर्डों / राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं। सभी 12 महापत्तन कार्यात्मक हैं। 200 गैर-महापत्तन में से, लगभग 65 पत्तन कार्गो की संभलाई कर रहे हैं और अन्य "पोर्ट लिमिट्स" हैं जहाँ कोई कार्गो नहीं संभाला जाता है और इनका उपयोग मछली पकड़ने वाले जलयानों  और छोटी नौकाओं द्वारा यात्रियों को खाड़ियों (क्रीक्स) आदि के पार ले जाने के लिए किया जाता है।

महापत्तन न्यास MAJOR PORT TRUSTS

 चेन्नई पत्तन न्यास

 कोचीन पत्तन न्यास

  दीनदयाल पत्तन न्यास
   जवाहरलाल नेहरू पत्तन न्यास
   कांडला पत्तन न्यास
   कोलकाता पत्तन न्यास
   मुरगांव पत्तन न्यास
   मुंबई पत्तन न्यास
   नव मंगलौर पत्तन न्यास

  विशाखापत्तनम पत्तन न्यास

  वी.ओ.चिदंबरनार पत्तन न्यास

महापत्तन न्यास अधिनियम,1963 और भारतीय पत्तन संघ अधिनियम, 1908

सभी 12 महापत्तन  महापत्तन न्यास अधिनियम,1963 के तहत शासित हैं। सभी गैर-महापत्तन (छोटे पत्तन)  भारतीय पत्तन संघ अधिनियम, 1908 के तहत शासित होते हैं, जिसमें 69 खंड और दो अनुसूचियां शामिल हैं और बर्थों, स्टेशनों, लंगर डालने, फास्टनिंग, जलयानों के बांधने(मूरिंग) और खोलने(अनमूरिंग) का विनियमन करता है। इसके साथ ही, यह महापत्तनों के अलावा अन्य पत्तन में सरकार से संबंधित ऐसी मूरिंग  के उपयोग के लिए भुगतान की जाने वाली दरों को तय करता है। यह बेड़ों (कैटामरैन) को चलाने या किराए पर लेने और ऐसे किसी भी पत्तन  के अंदर आग और प्रकाश के उपयोग का भी विनियमन करता है।

समुद्री  राज्य विकास परिषद (एम एस डी सी)

एम एस डी सी का गठन मई, 1997 में तत्कालीन माननीय मंत्री (भूतल परिवहन) की अध्यक्षता में हुआ था।  सभी समुद्री राज्यों / संघ शासित राज्यों के पत्तनों के प्रभारी मंत्री ,सचिव (भूतल परिवहन) और डी ए (पत्तन) इसके सदस्य तथा  संयुक्त सचिव(पत्तन) इसके  सदस्य सचिव थे । प्रशासक, केंद्र शासित प्रदेश, दमन और दीव को नवंबर, 1997 में एक सदस्य के रूप में जोड़ा गया था। मार्च 2003 में नौसेना संचालन निदेशक,  नौसेना मुख्यालय, नई दिल्ली और निदेशक (संचालन), कोस्ट गार्ड को एम एस डी सी में सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। माननीय पोत परिवहन राज्य मंत्री की अध्यक्षता में समुद्री राज्य विकास परिषद के अनिवार्य निर्देश के अनुसार, परिषद छह महीने में कम से कम एक बार बैठक करेगी।

महापत्तन प्राधिकरण विधेयक, 2019

 

    देश में 11 महापत्तन न्यास हैं, जो महापत्तन न्यास अधिनियम, 1963 के द्वारा शासित हैं। सरकार द्वारा महापत्तनों की परिचालन क्षमता में सुधार लाने और क्षमता संवर्धन के लिए बहुत से उपाय किए जा रहे हैं। हालांकि, महापत्तन न्यास अधिनियम के प्रतिबंधात्मक दायरे के तहत, महापत्तनों को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करना और बाजार की चुनौतियों का सामना करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। न्यासी बोर्ड बहुत बड़ा है और इसमें पत्तन उपयोगकर्ताओं, श्रम, व्यापार संघों सहित असमान हितों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो निर्णय लेने को बोझिल बनाता है, और, कई बार ऐसे फैसले लिए जाते हैं, जो पूरी तरह से वाणिज्यिक और आर्थिक हित पर आधारित नहीं होते हैं। यहाँ तक कि और जायदा शक्तियां प्रदान करने और महापत्तन न्यास अधिनियम में समय-समय पर कुछ संशोधन करने के बावजूद  भी, , पत्तन  उपयोगकर्ताओं को कुशल सेवाएँ प्रदान करने का मूल उद्देश्य पूरी तरह से हासिल नहीं किया जा सका  है।

      महापत्तनों को और अधिक स्वायत्तता और लचीलापन प्रदान करने और उनके शासन को पेशेवर बनाने के उद्देश्य से, वर्ष 2016 में महापत्तन न्यास अधिनियम, 1963 में बड़े पैमाने पर संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया था। चूंकि, संशोधनों की संख्या अधिक थी, इसलिए मौजूदा एमपीटी अधिनियम, 1963 को नए अधिनियम, अर्थात  ‘महापत्तन प्राधिकरण विधेयक,2016’ के द्वारा  बदलने का प्रस्ताव किया गया था। इस विधेयक को लोकसभा में 16.12.2016 को पेश किया गया था, लेकिन इसे लोकसभा के बिजनेस की सूची में शामिल न किए जाने के कारण यह पारित नहीं किया जा सका। 16 वीं लोकसभा के भंग होने पर, विधेयक व्यपगत हो गया था।

    हाल ही में सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के साथ मंत्रिमंडल की आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने के बाद संसद में विधेयक को फिर से प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया है। मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने से पहले, हितधारकों के विचारों / टिप्पणियों को प्राप्त करने के लिए महापत्तन प्राधिकरण विधेयक 2019 के मसौदे को पोत परिवहन  मंत्रालय की वेबसाइट में डाला गया है। हितधारकों के विचारों / टिप्पणियों की मंत्रालय में जांच की जा रही है।

महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (टी ए एम पी)

महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (टी ए एम पी) की स्थापना

 

महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (टी ए एम पी) का सृजन 1997 में हुआ था। इस प्राधिकरण का विनियामक क्षेत्राधिकार महापत्तन न्यासों और उनमें संचालित होने वाले निजी टर्मिनलों तक लागू होता है।

भूमिका, कार्य और संगठनात्मक संरचना

इस प्राधिकरण को महापत्तन न्यासों और उन पर संचालित निजी टर्मिनलों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के दर-मान तथा शर्तों के विवरण बनाने के साथ ही साथ पत्तन  संपत्तियों के उपयोग के लिए शुल्क निर्धारित करने के लिए वैधानिक रूप से अधिदेशित  किया गया है।

प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं। अध्यक्ष का स्तर भारत सरकार के सचिव के पद का  है, एक सदस्य अर्थशास्त्रियों में से होते हैं, जिन्हें वित्त क्षेत्र का अनुभव होता है। वर्तमान में महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (टी ए एम पी) सदस्य (वित्त) और सदस्य (अर्थशास्त्र) के साथ काम कर रहा है।

महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (टी ए एम पी) का मुख्यालय मुंबई में स्थित है।

प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या 36 है। इसके विपरीत, दिनांक 01/04/2019 को मौजूदा जन शक्ति 30 है, जिसमें 08 समूह “क’ के पद, 08 समूह “ख’ के पद, 09 समूह “ग’ के पद और 05 समूह “घ’ के पद शामिल हैं।

प्राधिकरण की बैठकें

प्रशुल्क मामलों का निपटारा करने और इस प्राधिकरण की बैठकों के संचालन करने के लिए अपनाई जाने वाली  प्रक्रिया को महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (कारोबार का संचालन) विनियम, 1998 के द्वारा विनियमित किया जाता है।

यह प्राधिकरण महापत्तन न्यासों और उन पर संचालित होने वाले निजी टर्मिनलों के विनियमन हेतु भारत सरकार द्वारा जारी किए गए निम्नलिखित दिशानिर्देशों का पालन करता है-

क्रम संख्या

दिशानिर्देश

अधिसूचना की तिथि

  1.  

अग्रिम प्रशुल्क दिशानिर्देश,2008

26-02-2008

  1.  

निर्देशांकित प्रशुल्क दिशानिर्देश,2013

30-09-2013

  1.  

स्टीवडोरिंग और शोर हैंडलिंग हेतु अग्रिम प्रशुल्क के निर्धारण के लिए दिशानिर्देश, 2016

15-09-2016

  1.  

महापत्तनों के लिए ड्राई बल्क कार्गो हेतु बर्थिंग नीति,2016

पोत परिवहन मंत्रालय का दिनांक 16 जून 2018 का पत्र

  1.  

(क) महापत्तनों के लिए प्रशुल्क निर्धारण नीति,2018

16-01-2019

 

(ख) महापत्तनों के लिए प्रशुल्क के निर्धारण हेतु नीति को संचालित करने के लिए कार्यकारी  दिशानिर्देश, 2018

 

  1.  

(क) यातायात दिशानिर्देश,2019

07-03-2019

 

(ख) प्रशुल्क  दिशानिर्देशों को संचालित करने के लिए कार्यकारी दिशानिर्देश,2019

07-03-2019

दिशानिर्देश

महापत्तनों में फ्लोटिंग स्टोरेज री-गैसीफिकेशन यूनिट (एफ एस आर यू ) की स्थापना के लिए दिशानिर्देश
ट्रेजरी निवेश सुधार के लिए दिशानिर्देश
महापत्तनों में पीपीपी परियोजनाओं के लिए एस ए आर ओ डी – पत्तन  नियम और मौजूदा रियायत प्राप्तकर्ताओं  के लिए पूरक समझौता

10.11.2017 को सीसीएस द्वारा अनुमोदित पीपीपी परियोजनाओं और महापत्तनों में ड्रेजिंग परियोजनाओं के लिए सुरक्षा मंजूरी दिशानिर्देश
महापत्तनों में पत्तन निर्भर उद्योगों  को वाटरफ्रंट और संलग्न भूमि देने की नीति
महापत्तनों में पीपीपी परियोजनाओं के लिए संशोधित एमसीए
भूमि नीति दिशानिर्देश
स्टीवडोरिंग नीति
कैपटिव नीति
बर्थिंग पॉलिसी