सागरमाला

प्रस्‍तावना

भारत में समुद्री क्षेत्र, देश के व्‍यापार का आधार स्‍तंभ रहा है औ‍र पिछले वर्षों के दौरान इसमें कई गुना वृद्धि हुई है। भारत की 7500 कि.मी. लंबी तटरेखा, 14,500 कि.मी. के नौचालन योग्‍य संभाव्‍य जलमार्गों और अंतर्राष्‍ट्रीय समुद्री व्‍यापार जलमार्गों में भारत के रणनीतिक स्‍थान का उपयोग करने के लिए भारत सरकार द्वारा महत्‍वाकांक्षी सागरमाला कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्‍य देश में पत्‍तन-आधारित विकास करना है।

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अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग डिवीजन समुद्री क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए करारों/समझौता ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर करना, समुद्री परिवहन समझौते के लिए आसियान, यूरोपीय संघ, बिमस्‍टेक एवं ईएफटीए के साथ नियमित रूप से संयुक्‍त कार्यकारिणी समूह की बैठकें आयोजित करना एवं वार्ता करना सहित विदेशी समुद्री देशों के साथ समुद्री मामलों पर कार्य करता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की प्रमुख विनियामक निकाय, अंतर्राष्‍ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ), जिसका भारत एक सदस्‍य है, से संबंधित कार्य भी इस डिवीजन में किए जाते हैं, इनमें आईएमओ बैठकों में भाग लेने के लिए अधिकारियों को प्रतिन

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अंतर्देशीय जल परिवहन

अंतर्देशीय जल परिवहन (आई डब्ल्यू टी)  स्कन्ध  राष्ट्रीय जलमार्गों  (रा.ज.) में विकास, प्रबंधन, क्षमता निर्माण के कार्यान्वयन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण पहलों के लिए उत्तरदायी है। वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार इस स्कन्ध  के प्रमुख हैं, जिन्हें निदेशक (आईडब्ल्यूटी), दो अवर सचिवों और आई डब्ल्यू टी अनुभाग द्वारा कार्य सहायता दी जाती है।

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Shipping

पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग  स्‍कंध – नौवहन, समुद्री विकास, पोत निर्माण, पोत मरम्‍मत और पोत भंजन उद्योग के लिए नीतियां एवं योजनाएं तैयार करता है। भारतीय पोत परिवहन उद्योग ने पिछले कुछ वर्षों में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के परिवहन क्षेत्र में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो कच्‍चे तेल, पेट्रोलियम उत्‍पादों और अन्‍य कार्गो के लिए परिवहन का एक आवश्‍यक साधन प्रदान करता है। देश के व्‍यापार का मात्रा की दृष्टि से लगभग 95% और मूल्य की दृष्टि से 68%  हिस्सा समुद्री परिवहन के माध्‍यम से स्‍थानांतरित किया जाता है।

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विकास

विकास स्‍कंध के अध्यक्ष,  विकास सलाहकार (पत्‍तन) हैं। उनकी सहायता के लिए दो निदेशक, दो उपनिदेशक और एक सहायक निदेशक हैं। 

विकास स्‍कंध, एक शीर्ष तकनीकी संगठन है जो पत्‍तन विकास से संबंधित विषयों से संबंधित कार्य करता है और महापत्‍तन परियोजनाओं के विकास, अंडमान एवं लक्षद्वीप बंदरगाह संकर्म (एएलएचडब्‍ल्‍यू) और ड्रेजिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया आदि से संबंधित मामलों पर तकनीकी सलाह देता है। 

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